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Monday, 2 November 2026
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आयुर्वेद में रोगी का सही आहार ही सबसे बड़ी दवा

नई दिल्ली, 11 दिसंबर। सर्दी का मौसम हो या कोई भी बीमारी, मरीज के लिए सबसे जरूरी होता है ऐसा आहार जो पेट पर भारी न पड़े, जल्दी पच जाए और शरीर को ताकत दे। आयुर्वेद इस बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

चरक संहिता में स्पष्ट कहा गया है, “आहार सर्वश्रेष्ठ औषधि है,” अर्थात् सही खानपान सबसे सुरक्षित और प्रभावी दवा है। जब पाचन शक्ति कमजोर हो, तब भारी, ठंडा, तला-भुना या ज्यादा मसालेदार भोजन रोगी की स्थिति और बिगाड़ सकता है। इसके स्थान पर आयुर्वेद हल्के और गुणकारी आहार की सलाह देता है, जो रोगी के लिए लाभदायक होते हैं।

सबसे उपयुक्त विकल्प मूंग दाल है। आयुर्वेद के अनुसार यह त्रिदोषशामक (वात, पित्त, कफ को नियंत्रित करने वाला), शीतल और सुपाच्य होती है। बुखार, उल्टी, दस्त या कमजोरी में पतली मूंग दाल का पानी या हल्की खिचड़ी रोगी के लिए सुरक्षित और ऊर्जा देने वाला भोजन है। मूंग और चावल की खिचड़ी में आधा चम्मच देसी घी मिलाने से शरीर की मरम्मत तेजी से होती है और पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है।

गुनगुना पानी हर स्थिति में पहला उपचार है। यह कफ को पतला करता है, पेट की गैस व थकान दूर करता है और मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखता है। डिहाइड्रेशन या बुखार में नारियल पानी स्वाभाविक इलेक्ट्रोलाइट के रूप में कार्य करता है, जो शरीर के खोए हुए मिनरल्स को जल्दी पुनः प्राप्त करता है। जब भूख न लगे या पेट भारी हो, तो हल्का नमक और भुना जीरा डालकर मठ्ठा या छाछ पिलाने से अग्नि बढ़ती है और आंतों की सूजन कम होती है।

फलों में सेब, पपीता और चीकू रोगी के लिए सबसे सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि ये हल्के होते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते हैं। खट्टे फल कुछ मामलों में हानिकारक हो सकते हैं, इसलिए सावधानी आवश्यक है। सर्दी-खांसी और बदन दर्द में अदरक-लौंग, तुलसी का काढ़ा और गले की खराश में गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद बहुत प्रभावी होते हैं।

देसी घी ताकत बढ़ाता है और बुखार के बाद की कमजोरी दूर करता है। सब्जियों या दाल का पतला सूप पोषण और हाइड्रेशन दोनों प्रदान करता है।

आयुर्वेद का मूल मंत्र है, “हल्का खाओ, गर्म खाओ, सुपाच्य खाओ और समय पर खाओ।” भोजन से जुड़े सरल नियमों का पालन करने से मरीज की सेहत जल्दी सुधरती है। हालांकि, भोजन संबंधी किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

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Daily Kiran