चित्रांगदा सिंह ने कहा – ‘ना’ कहना भी जरूरी है करियर में

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Ganpat Singh Chouhan

Mumbai, 2 January. फिल्म इंडस्ट्री जितनी चमकदार दिखती है, उतनी ही चुनौतिपूर्ण भी होती है। कलाकारों के लिए यह तय करना कि कौन सा प्रोजेक्ट करना है और किसे मना करना है, बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि ये फैसले उनके करियर की दिशा निर्धारित कर सकते हैं। इस विषय पर अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने अपनी बात साझा की।

चित्रांगदा सिंह ने बताया कि अपने करियर में ‘ना’ कहना सीखना उनके लिए सबसे जरूरी अनुभवों में से एक रहा है। उन्होंने कहा, “अगर कोई कलाकार बार-बार खराब काम करता है, तो उसकी पहचान और विश्वसनीयता धीरे-धीरे कम हो जाती है। ऐसे में कुछ चीजों के लिए ‘ना’ कहना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह एक अभिनेता की इमेज को बचा सकता है। खराब फिल्मों या कमजोर किरदारों को स्वीकार करने से कलाकार की छवि को नुकसान पहुंचता है।”

उन्होंने आगे कहा, “जरूरी नहीं कि हर बार मना किया गया फैसला सही हो। कई बार अच्छे प्रोजेक्ट हाथ से निकल जाते हैं और बाद में लगता है कि वह एक गलती थी। लेकिन कई मौके ऐसे भी आए हैं जब मैंने किसी फिल्म को मना किया और आज तक मुझे उस पर कोई पछतावा नहीं है। ऐसे फैसलों ने मुझे आत्मसंतोष दिया और करियर को सही दिशा दी।”

इंटरव्यू में चित्रांगदा सिंह ने यह भी बताया कि किसी भी अभिनेता के स्टारडम में पूरी टीम की अहम भूमिका होती है। वह कहती हैं, “आखिरकार फिल्म सिर्फ एक अभिनेता से नहीं बनती, बल्कि निर्देशक, लेखक, एडिटर और पूरी क्रिएटिव टीम मिलकर इसे आकार देती है। निर्देशक का नजरिया, किरदार को देखने और दिखाने का तरीका, और एडिटिंग टेबल पर लिए गए फैसले, ये सभी चीजें किसी अभिनेता के प्रदर्शन को निखारने में मदद करती हैं।”

उनका मानना है कि अच्छे फिल्मकारों के साथ काम करने से अभिनेता अपने आप बेहतर होता जाता है। “जब निर्देशक की सोच मजबूत होती है और कहानी को ईमानदारी से पेश किया जाता है, तो कलाकार को अपने किरदार में गहराई दिखाने का मौका मिलता है। इसलिए मेरे लिए सिर्फ स्क्रीन टाइम नहीं, बल्कि फिल्म की गुणवत्ता और टीम की सोच ज्यादा मायने रखती है।”

पीके/एबीएम

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